उर्हरैत मिथिला’क नन्हकु/नन्हकी

२०८२ श्रावण ४, आईतवार १२:०३

जितेन्द्र, हॅंस्पुर-३, धनुषा  / बितल किछ बरख’स नेपाल’क मधेश प्रदेशमे व्याप्त रहल समस्यामे एगो आउर समस्या जन्मै जा रहल छैत आ ऊ समस्या आउर किछ नै “नाईन्हटा बच्चाबुच्ची घर सऽ भाईग कऽ प्रेम विवाह कैर रहल अछि” आ एई गतिविधि चरम छुनै जाईत देखल जा सकैअ।

“नाईन्हटा बच्चाबुच्ची घर’स भाईग कऽ प्रेम विवाह कैर रहल अछि” सामान्य अर्थमे १८ बरख’स कम उमेर’क लडका आ लडकी कऽ परिवार’क पक्ष’क अनुमति बिना या समाज’क रीति आ मन्याता’स विपरीत भऽ गृह त्याग कऽ मन्दिर आ कोनो उपयुक्त स्थानमे कयल जाएबाला विवाह कहल जाएत अछि।जैमे परिवार कऽ कोनो हात नै रहल मान्याता प्रस्तुत कएल जाईछै।

एहि समस्याक इतिहास’क पन्ना पल्टाईल जाई तऽ अवगत होईत अछि जे एई गतिविधि केर इतिहास बहुत प्राचिन छैत।आजुको समयमे समस्या’क रूप मे प्रसिद्ध होइत जारहल अकर जैर बहुत गहिर एवम् पुराण छैत।दुटा प्रेमी जोडी’क एक-दोसर’क संगत भंग करेवाक चेष्टा होइ’क कारण ई एगो समस्याके रूपमे प्रसिद्ध होइत जारहल अछि।दुटा अविवाहित मनुख एक-दोसरसॅं प्रेम नै कैर सकैअ तेहन मान्याता आ प्रतिबन्ध’क नियम ई तथाकथित समाज बहुत पहिनते’स अवलम्बन करैत आरहल छैत।जकर सिकार विश्व चर्चित प्रेमी लोकैन जेना लैला-मजनु,हिर-रांझा,रोमियो-जुलियट, भेलेनटाईन इत्यादि भेल रहथिन।आ अन्ततः बिछोड’क अनन्त पिडा’स हिन्का सभक अन्त भेल रहथिन।ताएं समय बदल्लाक बाधो जड रहल समाज’क एई प्रवृति’स मुक्ती नै भेलाक कारण अखुनियो अहन सभ्यातामे तैप रहल प्रेमी एकसॅंग होबाक चेष्ठा करैत ऐहन अन्तिम कदम उठाबैत देखल जाईत अछि।

आब चलु मुद्दा’क गफ करैछि।ई व्याख्या कर सऽ पहिने अपने सब गोटे’स एगो सरल प्रश्न पुछ चाहैछि” एहि समस्या’क मुल जैर कि/के रहल छैत?” कनि समय ठहैर कऽ सोचल जाऊं तऽ।
हॅं अहां सही सोच्लौं “सही आ समयानुकल शिक्षा आ सोच’क अभाव”।तऽ अपनहि कहल जाऊं कि ई समस्या केवल मधेशेमे छैत कि आउर ठाममे नै छैत? मुदा एई के कारण सऽ भाईग’क विवाह करैत अवस्था शृज्ना नै भेल छैत।मधेशेमे कियाक? कि कोनो आउर दोसर कारण छैत? जी हॅं अवस्य एगो गहिर आ महत्वपूर्ण कारण छैत।ऊ कारण दोसर कोनो नै ‘जातिपाति’ रहल अछि।चलूं एई विषय पऽ अपन मत प्रस्तुत करैछि।हरेक बुंदा पऽ स्वयम अपनहु विचार कएल जैतैंसे आसा।

एक्काइसौं शताब्दी आ अत्याधुनिक संसार’क आगमन होइतो मधेश’क लोक जै चिज’स उपर नै उईठ सकल अछि ऊ छै हुन्का सभक मानसपटलमे गहिर घर बना बैठल जातिपाति’क सडल सोच।जै ठाम जगत जननी जान्की जी, विदेह एवम् विश्व’क अति विवेकशील राजा जनक, जतऽ संकर जी उगना भऽ आउल, आ जतऽ सहित्य’क भवरी फुटल विद्यापति,गोणु झा,नागार्जुन,कालिदास, इत्यादी महान मनुख’क जन्मस्थल रहंला।जै ठाम’क मिठगर भाषा आ संस्कृतिक अद्भुत विविधता रहल पूरा विश्वमे पहिचानल जाईत अछि।

जै ठाम’क कहियो संसार’क विद्वान’क खजाना कहल जाईत छलाहा मुदा अखिन एकटा अतेक छोट चिज जातिपातिमे अटैक गेल छैत जे अपनेमे अपन सभ्याता’क घोर अपमान करैत नजर आरहल छैत।हे माननौ अहांक बात… ‘जातिपाति’ मनुख’क पहिचानक एगो जरिया अछि… मुदा कतेक दिन…जहिया रहलाहा तहिया रहिया रहलाहा… आजुक समय किछ आउर छैत जै ठाम किछ समय पहिले देल गेल पूर्ण सहमतिक परिभाषा क्षणमे बदैल जाईत अछि तै ठाम जातिपाति केर विषय कतेक सार्थक आ महत्वपूर्ण छैत?
मुदा तैयो एहि सडल जातिपाति आ धर्म’क प्रपन्च आ विभेदक भट्टि’क आईगमे हजारौं मनुख तैप रहल छैत।आ जड बैन गेल छै साथे अहिने कुन्ठल प्रवृति एहन अवस्था’क शृज्ना कऽ सकैअ।

जब इतिहास स्वयम गवाही दैत अछि से प्राचिन समयमे मनुख’क काम देख’क फरक-फरक श्रेणीमे बाईंट’क जाति बनाईल गेल रही।आ कर्मके आधार पऽ व्राहमण,क्षेत्री आ सुद्र के पदवी सेहो देल जाईत रही।ताएं आब कहल जाऊं अभिके समयमे किनकर काम एकदम सुनिश्चित छैत? जिन्का जाति’क मेहमे बान्हल जा सकैअ? जिन्का अहां समाज’क सबस निच आ छोट जाति’क लोक कहैत छलहुं ऊहो आब बडका बडका कार्यलय’क प्रमुख भऽ बैठल छैत आ जिन्का सब’स उच्च आ बडका जाति’क लोक कहैत छलहुं उहो समाजद्वरा निर्धारण कयल गेल सब’स निम्न कोटी’क काम कऽ रहल छैत।आ एईमे भेदे कि छैत जब अन्ततः सब गोटेके खाय’क अन्ने छैत ताएं।हम एई प्रष्ट पारऽ चाहलहुं हॅं कि समय परिवर्तनशील छैत आ एई कऽ सहृदय स्वीकार बाहेक आउर कोनो चारा नै छैत मनुख’क लेल।आ परिस्थिती’क निक सऽ अध्ययन कएल जाई तऽ परिवर्तन साफ साफ झल्कैत अछि।

ताएं कहल जाऊं जाति नै मिललाक कारण विवाह नै होयबाक चाही इऽ कतेक तर्कपूर्ण आ समयपरक छैत?

समाज’क एगो आउर पाखण्ड’क विषय जे रहल अछि “सब गोटेके प्रेम कर्वाक चाही” एई गफमे कोनो दुईमत नैअछि आ मनुख लक्ष्य सेहो होबाक चाही।एई मुद्दा’क पाखण्ड एहि दुवारे कहलौं हॅं जे स्वयम् कहैत छैत जे सब गोटेके प्रेम कर्वाक चाही उहे ओकर विरूद्ध कियाक भऽ जाईत अछि? जेना जब केऊ किन्को सऽ प्रेम करला चाहैछै तऽ हुन्कर प्राण तक सेहो कोना लिअला आतुर भऽ जाईत आ लईयो लैइत अछि।उदाहरण’क लेल आजुक विषय जे ‘यदि लडका लडकी एक-दोसर सऽ प्रेम करैत विवाह कर लेल चाहैत अछि तऽ ऐईमे गलत कि अछि? अन्ततः किन्को सऽ तऽ विवाह कर्हिक के छैत ताएं अपन प्रियसी सऽ किया नै होयबाक चाही? मुदा तथाकथित समाज कोना स्वीकृत कर्तैं अपन मर्यादा’क विपरीत कऽ चिज।जै मर्यादामे पहिल बुंदे जातिपाति, ईज्जत’क नाक,विवाहक देखावटी तामझाम,नकली गर्वक छाती आ पाग,शोहरत कऽ प्रचार, भाईभर्दार’क सम्मान आदि इत्यादी रहल होय।ताएं अपन मर्यादा’क स्वार्थ पूरा कर्वाक हेतु आ ई जग भंग होय से कोना चाहत? ताएं लेल दुटा प्रेमी’क एकदोसर’स अलग कर्वाक सदैव अथेष्ठ चेष्ठा करैत रहैत छैत आ यदि मौका पऽ पकडा जाय तऽ अलग सेहो कैइए दैत अछि तहि’क डर सऽ अन्ततः घर’स भाईग कऽ विवाह कर्वाक निर्णय आ कदम उठाईल जाईत अछि।अपनही कहल जाऊ कोन प्रेमी अपन प्रेयसी’स दुर होयव चाहैछै? यदि अपनहु कहियो किन्को’स प्रेम कैनै होयब तऽ सत सत कहब अपनहु हुन्का पाबै लेल जरूर अपन पूरा जीउ-जान अवश्य लगौने होयब।कतेक कोई समाजक’ रीति’स विमुख भऽ अपन प्रियसी प्राप्त कैनै होयब तऽ कतेक कोई अभियो हु्न्के यादमे ’कास ऊ हमरा जीवनमे रैहतहुं?” क रट्ट लगा कऽ बैठल होयब।
आब कहल जाऊं एई समस्या’क जैर कि आ के भेलै?

हमर एकैटा मत हॅं कि प्रेम’क समान कएल जाऊं बस्स।तऽ कि हुन्का सभके अत्तेक कमे उमेरमे जीवन’क अहम कदम ‘विवाह कर्वाक’ अनुमति दऽ देवाक चाही? तऽ अई मामिलामे हम अपने शख्त खिलाफ छि कारण १२-१५ वरख’क लडका लडकी कऽ शारीरिक,मानसिक आ दिमाग’क विकास ओतवो नै भेल रहैत अछि जे विवाहक उपरान्त(बाध) कयल जाईबाला क्रियाकलाप कऽ सहि नतिजा दऽ सकै आ दोसर महत्वपूर्ण गफ जे वैवाहिक जीवन’क अभिन्न ॲंग आ अति आवश्यक वस्तु जे कि ‘आर्थिक सबलता’ रहल छैत।जे बच्चा सब चिज’क पुर्ति लेल माय बाप पऽ पूर्ण रूपेन निर्भर रहे हुन्का तऽ तुरून्त विवाह कर्वाहिक नै चाही।ताएं अई नजरिया सऽ बहुत हद तक सहि लगैत अछि जे विवाह नहिये होवाक चाही आ एहन विवाह कऽ घोर निन्दा हमहु करैत छि।
मुदा तईयो कहल जाऊ एहन विकृतीपूर्ण गतिविधि दिन प्रति दिन कियाक बैढते जारहल छैत त?…. तऽ एकर सिधा सऽ उत्तर निकलैत छैत अशिक्षित समाज।से कोना? तऽ ध्यान सऽ सुनल जाऊ।यदि बच्चाबुच्ची’क बचपने सऽ शिक्षा’क महत्व,मनुख’क जिम्मेवारी,ठीक गलत कऽ भेद,परिवारिक ज्ञान,मनुख जीवनमे अर्थ’क महत्व,जीवनक लक्ष्य आ यौन शिक्षा,जाति,धर्म इत्यादि विषयमे खुईल कऽ ज्ञान देल जाए तऽ एहन कदम उठाब सऽ पहिले अपन कुशलक्षेम जरूर सोईंच लैतैं।
एई समस्याक कोना कऽ समाधान कयल जा सकैअ ? ताएं एई समस्या कऽ अचुक समाधानक कदम किछ एहि प्रकार उठाईल जा सकैअः व्यवहारिक शिक्षा’क जोडतोड सऽ प्रचार प्रसार कयल जाए,ज्ञान केवल किताबे कपीमे सिमित नै राईख कऽ जीवनमे उतारल जाए, मायबाप’क कर्तव्य केवल पैसा मात्रे देवाक नै सही सऽ लालनपोसन सेहो कायल जाए,बच्चा जे कहतै तुरून्त पूरा नै कऽकऽ सतमे आवश्यक रहल गफके मूल्यान्कन पश्चात देल जाई, हैराण करैत बच्चाबुची सऽ छुटकारा पावक लेल मोबाईल’क सहारा मात्रे नै दक ओई कऽ सट्टा ओही समयमे कथा,लघुकथा,दन्त कथा या एहन कथा जै सऽ ज्ञान मिले सुनाईल जाए कियाकि बच्चा दिमाग कऽ लेल कथाक सिख बहुत महत्वपूर्ण होइत छैत,बच्चा कऽ दुलारू सऽ सिक्का पऽ नै चढा कऽ घर आ खेतक काममे सेहो संलग्न कराएल जाए ताकि मनुख कऽ जीवनक संघर्ष अपना ॲाईख सऽ देख सकी आ अनुभव कऽ सकि,आवश्यकता सऽ बेसी रूपैया’क काज नै सोंपवाक चाहि,बच्चाबुच्चीमे प्रेम आ वासना जहन जीवनक अहम विषय पऽ सहि एवम् तर्कमुलक ज्ञान देल जाए, किन्को अधिकार’क हन्न कऽकऽ या हुन्का छात्ती’प बैठ’क आ जोरजबरजस्ती जहन कोनो जिम्मेबारी नै थोपल जाए कियाकि अई’स मनुख कुनैठ जाइत अछि आ प्रतिसोध’क भावना सेहो आ सकैअ ताएं जे छैत हुन्का ओही रूपमे स्वीकार कऽकऽ हुन्कर प्रयास’क प्रोत्साहन कयल जाएं, व्यक्ति’क मनोविज्ञान बुझवाक प्रयत्न कयल जाए, जातिपाति जहन पुराण सोच’स उपर उठवाक एकदम आवश्यक अछि,विवाह कर्वाक उमर करिब २७ साल करिब होयबाक चाही या आर्थिक आ मानसिक रूप’स सबल छैत तऽ वालिग भेला’क बाध विवाह कऽ सकैअ, वालविवाह पूर्ण रूपेन अन्त्य होएवाक चाही,बेटी’क विवाहमे मात्रे नै हुन्कर पढाईमे सेहो खर्च कएल जाईत,दहेज प्रथा’क अन्त्य पूर्ण रूपेन होयबाक चाही, धर्म ,जातिपाति, भाषा जहन विषय लकऽ होयबाला हिंसाक विरूद्ध कडा सऽ कडा कानुनी व्यवस्था होवाक चाही इत्यादी।

अन्ततः जातिपाति आ धर्म सऽ उपर उईठ’क सोचल जाएवाक चाही ताकि एहन गतिविधि कम होय कियाकि यदि अन्तरजातीय विवाह समाजद्वरा सहृदय स्वीकृत कएल जाईत आ वालविवाह पूर्ण रूपेन रोकल जाईत तऽ कम उमरमे रहल बच्चाबुच्ची एई दुटा पक्ष’स मुक्त भऽ वैवाहिक जीवनक लेल रहल महत्वपूर्ण पक्ष “अर्थ” आर्जन’क लेल आवश्यक रहल सीप सिखवाक प्रशस्त समय पौतिन आ तै सऽ आर्थिक सबलता आउत तकर बाध विवाह कोन बढका बात अछि… राजिखुसी कएल जाईत।

-जितेन्द्र
हॅंस्पुर-३, धनुषा

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