हम आजाद हैं तो किस और आजादी चाहिए तो किस ( कविता )

२०८३ श्रावण ७, बिहीबार १७:३४

म आजाद हैं तो किस
और आजादी चाहिए तो किस

आजाद कोई नहीं है यहां सही सुना आपने ना मैं ना अपना सरकार???

सोचने वाली बात है कि हम जा कहां रहे हैं और गुलाम बना कौन रहा है???

शिवकरण क्रांतिकारी बढ़ने लगते हैं तो जुखाम और खांसी के नाम पर कोविद-19 से दुनिया तबाह और बर्बाद होते हैं?

जो बच्चे और बच्चियों अभी एसएलसी से निकल भी नहीं है वह सड़कों पर आजादी मांग रहे हैं??

जब विचारधारा बनाकर एक युवानिकले तो इंटेलिजेंस के नाम पर आर्टिफिशियल से कंपैरिजन पर रखदिए गए
जब आपने अपना षड्यंत्र बनाने लगे ह ए लाकर हमारे 10 साल की सोच को उसने के नाम पर हमें ट्रैप में फंसे लगे।
मॉडर्न लाइफ के नाम पर केपीटलाइज्म बढ़ानेलगे
गुलाम तो थे और गुलामी करवाने लगे।

सोचने वाली बात है जब देश की कौन है कोने पर न्यूक्लियर बम का आह निकल रही थी तब केपीटलाइज्म के पावर ने आंखों पर पट्टी बांधकर धर्म के नाम पर मुंह बंद करवाने लगे l
Ushi इस दौरान एक न्यूज़ आता वन अब तक रिचेस्ट मैन इन द वर्ल्ड……..
माफिया काले चेहरे पर नहीं बल्कि काले कपड़ों में लपटे लपटे होते हैं……

We are gen z

We not frustrated not distractions we are not lazy we are not the employees on the political power

we are __we are
We are create an empire we are representing on Nation in globally we are Nation we are transparency we are accounting .
we are we are rebel 

बदलाव का बस एक षड्यंत्र है और वह है शिक्षा

यो खबर पढेर तपाईलाई कस्तो महसुस भयो ?